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mahabharat 12.91.50: तुम्हें सुन्दर, कुलीन, कार्यकुशल, राजभक्तों और ज्ञानी मन्त्रियों के साथ रहकर तपस्वियों और आश्रमवासियों की सम्पूर्ण बुद्धि (समस्त विचारों) की परीक्षा करनी चाहिए ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  12.91.50 
अभिरूपै: कुले जातैर्दक्षैर्भक्तैर्बहुश्रुतै:।
सर्वा बुद्धी: परीक्षेथास्तापसाश्रमिणामपि॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
तुम्हें सुन्दर, कुलीन, कार्यकुशल, राजभक्तों और ज्ञानी मन्त्रियों के साथ रहकर तपस्वियों और आश्रमवासियों की सम्पूर्ण बुद्धि (समस्त विचारों) की परीक्षा करनी चाहिए ॥50॥
 
You should test the entire intellect (all thoughts) of the ascetics and ashram residents by living with handsome, noble, efficient, royal devotees and knowledgeable ministers. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)