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श्लोक 12.91.5  |
तेषां य: क्षत्रियो वेद वस्त्राणामिव शोधनम्।
शीलदोषान् विनिर्हर्तुं स पिता स प्रजापति:॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| इनमें जो क्षत्रिय वस्त्रों से मैल हटाने वाले धोबी के समान चरित्र दोषों को दूर करना जानता है, वही प्रजा का पिता और प्रजा का शासक है ॥5॥ |
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| Among these, the Kshatriya who knows how to remove character defects like a washerman who removes dirt from clothes, is the father of the people and the ruler of the people. ॥ 5॥ |
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