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mahabharat 12.91.49: राज्य की रक्षा वही राजा कर सकता है जो बुद्धिमान और पराक्रमी होने के साथ-साथ दण्ड देने की नीति भी जानता हो। दण्ड देने में संकोच करने वाला नपुंसक और मूर्ख राजा कभी राज्य की रक्षा नहीं कर सकता॥ 49॥   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.91.49 
तद्दण्डविन्नृप: प्राज्ञ: शूर: शक्नोति रक्षितुम्।
न हि शक्यमदण्डेन क्लीबेनाबुद्धिनापि वा॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
राज्य की रक्षा वही राजा कर सकता है जो बुद्धिमान और पराक्रमी होने के साथ-साथ दण्ड देने की नीति भी जानता हो। दण्ड देने में संकोच करने वाला नपुंसक और मूर्ख राजा कभी राज्य की रक्षा नहीं कर सकता॥ 49॥
 
Only that king can protect the kingdom who, besides being wise and valiant, also knows the policy of giving punishment. An impotent and unwise king who hesitates to give punishment can never protect the kingdom.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)