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mahabharat 12.91.44: जैसे यमराज सब प्राणियों पर समान रूप से शासन करते हैं, वैसे ही राजा को भी बिना किसी भेदभाव के अपनी समस्त प्रजा पर विधिपूर्वक शासन करना चाहिए ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.91.44 
यमो यच्छति भूतानि सर्वाण्येवाविशेषत:।
तथा राज्ञानुकर्तव्यं यन्तव्या विधिवत् प्रजा:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जैसे यमराज सब प्राणियों पर समान रूप से शासन करते हैं, वैसे ही राजा को भी बिना किसी भेदभाव के अपनी समस्त प्रजा पर विधिपूर्वक शासन करना चाहिए ॥ 44॥
 
Just as Yamaraja rules over all creatures equally, similarly the king too must lawfully control all his subjects without any discrimination. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)