Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.91.42: मान्धाता! राजा यम के समान है क्योंकि वह दुष्टों को दण्ड देता है और धर्मात्माओं के लिए ईश्वर के समान है क्योंकि वह उन पर दया करता है। जब वह अपनी इन्द्रियों को वश में करता है, तो वह शासन करने में समर्थ होता है और जब वह उन पर नियंत्रण नहीं रखता, तो वह मर्यादा से नीचे गिर जाता है। | mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यमो राजा धार्मिकाणां मान्धात: परमेश्वर:।
संयच्छन् भवति प्राणानसंयच्छंस्तु पातुक:॥ ४२॥
अनुवाद
मान्धाता! राजा यम के समान है क्योंकि वह दुष्टों को दण्ड देता है और धर्मात्माओं के लिए ईश्वर के समान है क्योंकि वह उन पर दया करता है। जब वह अपनी इन्द्रियों को वश में करता है, तो वह शासन करने में समर्थ होता है और जब वह उन पर नियंत्रण नहीं रखता, तो वह मर्यादा से नीचे गिर जाता है।
Mandhaata! The king is like Yama because he punishes the wicked and like God for the righteous because he shows mercy to them. When he controls his senses, he is able to rule and when he does not control them, he falls below the limits.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥