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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन
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श्लोक 41
श्लोक
12.91.41
निग्रहानुग्रहौ चोभौ यत्र स्यातां प्रतिष्ठितौ।
अस्मिन् लोके परे चैव राजा स प्राप्नुते फलम्॥ ४१॥
अनुवाद
जिस राजा में संयम और कृपा दोनों विद्यमान हैं, वह इस लोक और परलोक में मनोवांछित फल प्राप्त करता है ॥ 41॥
That king, who has both restraint 1 and grace 2, gets the desired results in this world and the next. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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