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mahabharat 12.91.40: जो राजा प्रेमपूर्वक सत्य का आचरण करता है, प्रतिदिन भूमि दान करता है, तथा अतिथियों और पालन-पोषण योग्य व्यक्तियों का सत्कार करता है, उसे राजा का धर्म कहा जाता है ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.91.40 
सत्यं पालयति प्रीत्या नित्यं भूमिं प्रयच्छति।
पूजयेदतिथीन् भृत्यान् स राज्ञो धर्म उच्यते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जो राजा प्रेमपूर्वक सत्य का आचरण करता है, प्रतिदिन भूमि दान करता है, तथा अतिथियों और पालन-पोषण योग्य व्यक्तियों का सत्कार करता है, उसे राजा का धर्म कहा जाता है ॥40॥
 
The king who lovingly practices truth, gives land in charity every day, and treats guests and persons worthy of maintenance with hospitality is called the Dharma of a king. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)