श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.91.28 
यत्र पापा ज्ञायमानाश्चरन्ति
सतां कलिर्विन्दते तत्र राज्ञ:।
यदा राजा शास्ति नरानशिष्टां-
स्तदा राज्यं वर्धते भूमिपस्य॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जहाँ पापी मनुष्य निर्भय होकर विचरण करते हैं, वहाँ पुण्यात्मा पुरुषों की दृष्टि में ऐसा माना जाता है कि राजा दुष्काल से घिरा हुआ है; परन्तु जब राजा दुष्टों को दण्ड देता है, तब उसका राज्य सब ओर से समृद्ध होने लगता है ॥28॥
 
Where sinful men roam around fearlessly, it is believed in the eyes of virtuous men that the king is surrounded by the evil age; but when the king punishes the wicked men, then his kingdom starts prospering in all directions. ॥28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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