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श्लोक 12.91.28  |
यत्र पापा ज्ञायमानाश्चरन्ति
सतां कलिर्विन्दते तत्र राज्ञ:।
यदा राजा शास्ति नरानशिष्टां-
स्तदा राज्यं वर्धते भूमिपस्य॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| जहाँ पापी मनुष्य निर्भय होकर विचरण करते हैं, वहाँ पुण्यात्मा पुरुषों की दृष्टि में ऐसा माना जाता है कि राजा दुष्काल से घिरा हुआ है; परन्तु जब राजा दुष्टों को दण्ड देता है, तब उसका राज्य सब ओर से समृद्ध होने लगता है ॥28॥ |
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| Where sinful men roam around fearlessly, it is believed in the eyes of virtuous men that the king is surrounded by the evil age; but when the king punishes the wicked men, then his kingdom starts prospering in all directions. ॥28॥ |
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