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mahabharat 12.91.23: जब दूसरे गांव के लोग समूह बनाकर भिक्षुक का वेश धारण करके ब्राह्मणों की तरह भीख मांगने लगते हैं, तो एक दिन ऐसे लोग राजा का नाश कर देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.91.23 
युक्ता यदा जानपदा भिक्षन्ते ब्राह्मणा इव।
अभीक्ष्णं भिक्षुरूपेण राजानं घ्नन्ति तादृशा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब दूसरे गांव के लोग समूह बनाकर भिक्षुक का वेश धारण करके ब्राह्मणों की तरह भीख मांगने लगते हैं, तो एक दिन ऐसे लोग राजा का नाश कर देते हैं।
 
When people from other villages form a group and start begging like Brahmins in the guise of mendicants, then one day such people bring about the destruction of the king. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)