श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.91.22 
यत्राबलो वध्यमानस्त्रातारं नाधिगच्छति।
महान् दैवकृतस्तत्र दण्ड: पतति दारुण:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जहाँ सताया हुआ दुर्बल मनुष्य अपनी रक्षा करने वाला कोई नहीं पाता, वहाँ उसे सताने वाला पापी भगवान् से भयंकर दण्ड पाता है ॥22॥
 
Where a weak man who is being persecuted finds no one to protect him, the sinner who persecutes him receives a terrible punishment from God. ॥22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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