श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.91.19 
मा स्म तात रणे स्थित्वा भुञ्जीथा दुर्बलं जनम्।
मा त्वां दुर्बलचक्षूंषि दहन्त्वग्निरिवाश्रयम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे पिता! तू युद्ध में न लगकर दुर्बलों को पकड़कर उन्हें अपना भक्षण न कर। जैसे अग्नि अपने आधाररूपी लकड़ी को जला देती है, वैसे ही दुर्बलों को देखकर तू भी न जलना॥19॥
 
Father! Do not engage in war and make weak people the object of your consumption by capturing them. Just as fire burns the wood that is its support, similarly the sight of the weak should not burn you.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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