श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.91.18 
विमानितो हत: क्रुष्टस्त्रातारं चेन्न विन्दति।
अमानुषकृतस्तत्र दण्डो हन्ति नराधिपम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यदि अपमानित, घायल और अपशब्दों से पीड़ित दुर्बल मनुष्य राजा को रक्षक के रूप में प्राप्त नहीं कर पाता तो देवता द्वारा दिया गया दण्ड राजा को मार डालता है ॥18॥
 
If a weak person who is insulted, injured and abused is not able to get the king as his protector then the punishment given by the god kills the king. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)