श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.91.17 
अबलं वै बलाच्छ्रेयो यच्चातिबलवद्‍बलम्।
बलस्याबलदग्धस्य न किंचिदवशिष्यते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
दुर्बल प्राणी बलवान से श्रेष्ठ है, क्योंकि दुर्बल का बल अति बलवान से अधिक होता है। जब बलवान को दुर्बल जला देता है, तब उसका कुछ भी शेष नहीं रहता॥17॥
 
A weak being is superior to a strong one because the strength of a weak person is greater than that of a very strong person. When a strong person is burnt by a weak person, nothing remains of him.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)