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mahabharat 12.91.13: हे राजन! राजा जिन प्राणियों को भोजन आदि देकर उनकी सेवा करता है तथा जो राजा के सम्बन्धी हैं, वे सब राजा के अधर्मी हो जाने पर विलाप करने लगते हैं॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.91.13 
यच्च भूतं सम्भजते ये च भूतास्तदन्वया:।
अधर्मस्थे हि नृपतौ सर्वे शोचन्ति पार्थिव॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! राजा जिन प्राणियों को भोजन आदि देकर उनकी सेवा करता है तथा जो राजा के सम्बन्धी हैं, वे सब राजा के अधर्मी हो जाने पर विलाप करने लगते हैं॥13॥
 
O king! The creatures whom the king serves by giving them food etc. and those who are related to the king, all of them start lamenting when the king becomes unrighteous. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)