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mahabharat 12.91.10: जब राजा लापरवाह हो जाता है, तो उसकी पत्नी, पुत्र, रिश्तेदार और मित्र सभी एक साथ शोक मनाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.91.10 
राज्ञो भार्याश्च पुत्राश्च बान्धवा: सुहृदस्तथा।
समेत्य सर्वे शोचन्ति यदा राजा प्रमाद्यति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब राजा लापरवाह हो जाता है, तो उसकी पत्नी, पुत्र, रिश्तेदार और मित्र सभी एक साथ शोक मनाते हैं।
 
When the king becomes careless, his wife, son, relatives and friends all mourn together.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)