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mahabharat 12.91.1: उतथ्य कहते हैं - हे राजन! राजा को धर्म का पालन करना चाहिए और मेघों को समय पर वर्षा करनी चाहिए। इस प्रकार जो धन बढ़ता है, वह प्रजा को सुखपूर्वक भरण-पोषण प्रदान करता है॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 91: उतथ्यके उपदेशमें धर्माचरणका महत्त्व और राजाके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.91.1 
उतथ्य उवाच
कालवर्षी च पर्जन्यो धर्मचारी च पार्थिव:।
सम्पद् यदेषा भवति सा बिभर्ति सुखं प्रजा:॥ १॥
 
 
अनुवाद
उतथ्य कहते हैं - हे राजन! राजा को धर्म का पालन करना चाहिए और मेघों को समय पर वर्षा करनी चाहिए। इस प्रकार जो धन बढ़ता है, वह प्रजा को सुखपूर्वक भरण-पोषण प्रदान करता है॥1॥
 
Utthaya says - O King! The king should follow the religion and the clouds should rain on time. The wealth that increases in this way, provides sustenance to the subjects happily.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)