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mahabharat 12.90.5: सभी जीव धर्म पर आधारित हैं और धर्म राजा पर आधारित है। जो राजा धर्म का भली-भांति पालन करता है और उसके अनुसार शासन करता है, वह दीर्घकाल तक इस पृथ्वी का स्वामी बना रहता है।   |   mahabharat अध्याय 12.90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.90.5 
धर्मे तिष्ठन्ति भूतानि धर्मो राजनि तिष्ठति।
तं राजा साधु य: शास्ति स राजा पृथिवीपति:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
सभी जीव धर्म पर आधारित हैं और धर्म राजा पर आधारित है। जो राजा धर्म का भली-भांति पालन करता है और उसके अनुसार शासन करता है, वह दीर्घकाल तक इस पृथ्वी का स्वामी बना रहता है।
 
All living beings are based on Dharma and Dharma is based on the king. The king who follows Dharma well and rules in accordance with it remains the master of this earth for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)