Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.90.41: जब राजा अपने कर्तव्य का परित्याग करके प्रमाद करता है, तब एक भी मनुष्य अपने धन को अपना समझकर उस पर स्थिर नहीं रह सकता ॥41॥ | mahabharat अध्याय 12.90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ममेदमिति नैकस्य मनुष्येष्ववतिष्ठति।
त्यक्त्वा धर्मं यदा राजा प्रमादमनुतिष्ठति॥ ४१॥
अनुवाद
जब राजा अपने कर्तव्य का परित्याग करके प्रमाद करता है, तब एक भी मनुष्य अपने धन को अपना समझकर उस पर स्थिर नहीं रह सकता ॥41॥
When a king abandons his duty and becomes negligent, then not even a single man can remain steadfast in his wealth, thinking that it is his own. ॥ 41॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि उतथ्यगीतासु नवतितमोऽध्याय:॥ ९०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें उतथ्यगीताविषयक नब्बेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥