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mahabharat 12.90.39: जो राजा अपनी रक्षा नहीं करता, वह अपनी प्रजा की भी रक्षा नहीं कर सकता। पहले उसकी प्रजा नष्ट होती है, फिर वह स्वयं नष्ट होता है।   |   mahabharat अध्याय 12.90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.90.39 
अरक्षितात्मा यो राजा प्रजाश्चापि न रक्षति।
प्रजाश्च तस्य क्षीयन्ते तत: सोऽनुविनश्यति॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जो राजा अपनी रक्षा नहीं करता, वह अपनी प्रजा की भी रक्षा नहीं कर सकता। पहले उसकी प्रजा नष्ट होती है, फिर वह स्वयं नष्ट होता है।
 
A king who does not protect himself cannot protect his subjects either. First his subjects perish; then he himself perishes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)