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mahabharat 12.90.38: आकाश में धूमकेतुओं के समान भयंकर ग्रह और तारे उदय होते हैं और राष्ट्र के विनाश का संकेत देने वाली अनेक विपत्तियाँ दृष्टिगोचर होने लगती हैं ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 12.90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.90.38 
नक्षत्राण्युपतिष्ठन्ति ग्रहा घोरास्तथागते।
उत्पाताश्चात्र दृश्यन्ते बहवो राजनाशना:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
आकाश में धूमकेतुओं के समान भयंकर ग्रह और तारे उदय होते हैं और राष्ट्र के विनाश का संकेत देने वाली अनेक विपत्तियाँ दृष्टिगोचर होने लगती हैं ॥38॥
 
Terrible planets and stars like comets rise in the sky and many calamities indicating the destruction of the nation become visible. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)