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mahabharat 12.90.34-35: जब राजा धर्म के प्रति लापरवाह होता है, तो अंतर्जातीय विवाह के कारण श्रेष्ठ कुलों में पापी और राक्षस पैदा होते हैं। नपुंसक, एकनेत्रहीन, लंगड़े, अपंग, गूंगे और बुद्धिहीन संतानें पैदा होती हैं। ऐसी और भी अनेक दुष्ट संतानें पैदा होती हैं। इसलिए राजा को विशेष रूप से धार्मिक और सतर्क रहना चाहिए तथा प्रजा का कल्याण करने में तत्पर रहना चाहिए। ॥34-35॥   |   mahabharat अध्याय 12.90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  12.90.34-35 
कुलेषु पापरक्षांसि जायन्ते वर्णसंकरात्।
अपुमांसोऽङ्गहीनाश्च स्थूलजिह्वा विचेतस:॥ ३४॥
एते चान्ये च जायन्ते यदा राजा प्रमाद्यति।
तस्माद् राज्ञा विशेषेण वर्तितव्यं प्रजाहिते॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जब राजा धर्म के प्रति लापरवाह होता है, तो अंतर्जातीय विवाह के कारण श्रेष्ठ कुलों में पापी और राक्षस पैदा होते हैं। नपुंसक, एकनेत्रहीन, लंगड़े, अपंग, गूंगे और बुद्धिहीन संतानें पैदा होती हैं। ऐसी और भी अनेक दुष्ट संतानें पैदा होती हैं। इसलिए राजा को विशेष रूप से धार्मिक और सतर्क रहना चाहिए तथा प्रजा का कल्याण करने में तत्पर रहना चाहिए। ॥34-35॥
 
When the king is negligent towards religion, then due to inter-caste marriage, sinners and demons are born in the best families. Impotent, one-eyed, lame, crippled, dumb and unintelligent children are born. These and many other evil children are born. Therefore, the king should be especially religious and cautious and be ready to do the welfare of the people. ॥34-35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)