श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.90.30 
मत्तात्प्रमत्तात् पौगण्डादुन्मत्ताच्च विशेषत:।
तदभ्यासादुपावर्त संहितानां च सेवनात्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
शराबी, लापरवाह, बालक और विशेषकर पागल लोगों से दूर रहो। उनके निकट संपर्क से भी दूर रहो और यदि वे तुम्हारे साथ रहकर तुम्हारी सेवा करना चाहें, तो उस सेवा से भी पूरी तरह दूर रहो ॥30॥
 
Avoid drunkards, careless people, children and especially mad people. Avoid even their close contact and if they wish to stay with you and serve you, then completely avoid that service also. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)