श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.90.3 
उतथ्य उवाच
धर्माय राजा भवति न कामकरणाय तु।
मान्धातरिति जानीहि राजा लोकस्य रक्षिता॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उथ्य ने कहा - मान्धाता! राजा धर्म का पालन और प्रचार करने के लिए होता है, विषय-भोगों के लिए नहीं। तुम्हें यह जानना चाहिए कि राजा समस्त जगत का रक्षक होता है।
 
Utthaya said - Mandhaata! A king is meant to follow and propagate religion, not to enjoy sensual pleasures. You should know that the king is the protector of the entire world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)