श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.90.29 
स यथा दर्पसहितमधर्मं नानुसेवते।
तथा वर्तस्व मान्धातश्चिरं चेत् स्थातुमिच्छसि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
मान्धाता! यदि तुम बहुत समय तक सिंहासन पर बने रहना चाहते हो, तो ऐसा आचरण करो कि अहंकार और अधर्म में लिप्त न हो जाओ ॥29॥
 
Mandhaata! If you want to remain on the throne for a long time, then behave in such a way that you do not indulge in arrogance and unrighteousness. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)