Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.90.26: हे प्रभु! यह अभिमान और ईर्ष्या का फल है; इसलिए हे मान्धाता! सावधान रहो, कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारी शत्रु लक्ष्मी भी तुम्हें छोड़ दे।   |   mahabharat अध्याय 12.90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.90.26 
एतत् फलमसूयाया अभिमानस्य वा विभो।
तस्माद्‍बुध्यस्वमान्धातर्मात्वांजह्यात् प्रतापिनी॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! यह अभिमान और ईर्ष्या का फल है; इसलिए हे मान्धाता! सावधान रहो, कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारी शत्रु लक्ष्मी भी तुम्हें छोड़ दे।
 
O Lord! This is the result of pride and jealousy; therefore, O Mandhaata! Be cautious, lest your enemy Lakshmi also leaves you. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)