श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.90.22 
धर्मस्य ब्राह्मणो योनिस्तस्मात् तान् पूजयेत् सदा।
ब्राह्मणानां च मान्धात: कुर्यात् कामानमत्सरी॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मान्धाता! ब्राह्मण धर्म का मूल है; इसलिए ब्राह्मणों का सदैव सम्मान करना चाहिए, बिना किसी ईर्ष्या के ब्राह्मणों की हर इच्छा पूरी करना उचित है॥22॥
 
Mandhaata! Brahmins are the root of religion; therefore Brahmins should always be respected, it is appropriate to fulfill every wish of Brahmins without any jealousy. ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)