श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.90.21 
कामक्रोधावनादृत्य धर्ममेवानुपालय।
धर्म: श्रेयस्करतमो राज्ञां भरतसत्तम॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे भारतभूषण! तुम भी काम और क्रोध का परित्याग करके निरन्तर धर्म का पालन करो। राजाओं के लिए धर्म ही सबसे बड़ा हितकारी है॥ 21॥
 
Bharatbhushan! You too should ignore lust and anger and follow Dharma continuously. Dharma is the greatest benefactor for kings. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)