श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.90.2 
स यथानुशशासैनमुतथ्यो ब्रह्मवित्तम:।
तत् ते सर्वं प्रवक्ष्यामि निखिलेन युधिष्ठिर॥ २॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ उतथ्य ने जिस प्रकार उन्हें उपदेश दिया था, वह सम्पूर्ण कथा मैं तुम्हें सुनाता हूँ। कृपया उसे सुनो।
 
Yudhishthira! I am telling you the entire story of how Utathya, the best amongst the knowers of Brahman, had preached to them. Please listen to it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)