श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 90: उतथ्यका मान्धाताको उपदेश—राजाके लिये धर्मपालनकी आवश्यकता  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.90.17 
धर्मे वर्धति वर्धन्ति सर्वभूतानि सर्वदा।
तस्मिन् ह्रसति ह्रीयन्ते तस्माद् धर्मं न लोपयेत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब धर्म की वृद्धि होती है, तब सब प्राणी सदैव उन्नति करते हैं और जब वह घटता है, तब सब नष्ट हो जाते हैं; इसलिए धर्म को कभी लुप्त नहीं होने देना चाहिए ॥17॥
 
When Dharma increases, all beings always prosper and when it decreases, everyone perishes; hence Dharma should never be allowed to disappear. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)