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mahabharat 12.9.7: मैं सदैव वन में सुखपूर्वक निवास करने वाले पशु-पक्षियों की नाना प्रकार की ध्वनियाँ सुनूँगा, जो मन और कानों को सुख पहुँचाएँगी। ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.9.7 
मन:कर्णसुखा नित्यं शृण्वन्नुच्चावचा गिर:।
मुदितानामरण्येषु वसतां मृगपक्षिणाम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मैं सदैव वन में सुखपूर्वक निवास करने वाले पशु-पक्षियों की नाना प्रकार की ध्वनियाँ सुनूँगा, जो मन और कानों को सुख पहुँचाएँगी। ॥7॥
 
I will always listen to the various sounds of the animals and birds happily residing in the forest, which will give pleasure to the mind and ears. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)