अतः इस पूर्वोक्त विश्वास से निरन्तर विचरण करते हुए मैं अभय मार्ग का आश्रय लूँगा तथा जन्म, मृत्यु, जरा, रोग और दुःख से घिरे हुए इस शरीर को त्याग दूँगा।
Therefore, by continuously wandering through this aforesaid belief, I will take shelter of the fearless path and will put aside this body which is beset by birth, death, old age, disease and pain.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि युधिष्ठिरवाक्ये नवमोऽध्याय:॥ ९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें युधिष्ठिरका वाक्यविषयक नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥