Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.9.37: अतः इस पूर्वोक्त विश्वास से निरन्तर विचरण करते हुए मैं अभय मार्ग का आश्रय लूँगा तथा जन्म, मृत्यु, जरा, रोग और दुःख से घिरे हुए इस शरीर को त्याग दूँगा। | mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः इस पूर्वोक्त विश्वास से निरन्तर विचरण करते हुए मैं अभय मार्ग का आश्रय लूँगा तथा जन्म, मृत्यु, जरा, रोग और दुःख से घिरे हुए इस शरीर को त्याग दूँगा।
Therefore, by continuously wandering through this aforesaid belief, I will take shelter of the fearless path and will put aside this body which is beset by birth, death, old age, disease and pain.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि युधिष्ठिरवाक्ये नवमोऽध्याय:॥ ९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें युधिष्ठिरका वाक्यविषयक नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥