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mahabharat 12.9.35: नाना प्रकार के कर्म करके प्रसिद्ध हुआ राजा भी अन्य राजाओं द्वारा किसी तुच्छ कारणवश मारा जाता है ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.9.35 
कृत्वा हि विविधं कर्म तत्तद् विविधलक्षणम्।
पार्थिवैर्नृपति: स्वल्पै: कारणैरेव बध्यते॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार के कर्म करके प्रसिद्ध हुआ राजा भी अन्य राजाओं द्वारा किसी तुच्छ कारणवश मारा जाता है ॥35॥
 
Even a king who has become famous by performing various deeds is killed by other kings for some trivial reason. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)