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mahabharat 12.9.34: जब देवता भी स्वर्ग से च्युत हो जाते हैं और बड़े-बड़े ऋषिगण भी अपने स्थान से विस्थापित हो जाते हैं, तब कारण-तत्त्व को जानकर इस जन्म-मृत्युरूप संसार में किसकी रुचि होगी? ॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.9.34 
दिव: पतत्सु देवेषु स्थानेभ्यश्च महर्षिषु।
को हि नाम भवेनार्थी भवेत् कारणतत्त्ववित्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जब देवता भी स्वर्ग से च्युत हो जाते हैं और बड़े-बड़े ऋषिगण भी अपने स्थान से विस्थापित हो जाते हैं, तब कारण-तत्त्व को जानकर इस जन्म-मृत्युरूप संसार में किसकी रुचि होगी? ॥ 34॥
 
When even the gods fall from heaven and great sages are displaced from their places, then who, knowing the causal truth, will have any interest in this world of birth and death? ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)