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mahabharat 12.9.33: इस संसार में जन्म, मृत्यु, बुढ़ापा, रोग और दुःख हमें घेरे रहते हैं, जिससे यहाँ जीवन कभी स्वस्थ नहीं रहता। जो इस अनंत प्रतीत होने वाले संसार का त्याग कर देता है, वही सुख पाता है॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.9.33 
जन्ममृत्युजराव्याधिवेदनाभिरभिद्रुतम्।
अपारमिव चास्वस्थं संसारं त्यजत: सुखम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में जन्म, मृत्यु, बुढ़ापा, रोग और दुःख हमें घेरे रहते हैं, जिससे यहाँ जीवन कभी स्वस्थ नहीं रहता। जो इस अनंत प्रतीत होने वाले संसार का त्याग कर देता है, वही सुख पाता है॥ 33॥
 
In this world, birth, death, old age, illness and pain keep attacking us, due to which life here is never healthy. Only he who abandons this seemingly infinite world, finds happiness.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)