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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय
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श्लोक 3
श्लोक
12.9.3
क्षेम्यश्चैकाकिना गम्य: पन्था: कोऽस्तीति पृच्छ माम्।
अथवा नेच्छसि प्रष्टुमपृच्छन्नपि मे शृणु॥ ३॥
अनुवाद
एकान्तवासी के लिए कौन-सा कल्याण-मार्ग उपयुक्त है? यह मुझसे पूछो अथवा यदि पूछना न चाहो तो बिना पूछे ही मेरी बात सुनो॥3॥
Which is the path of welfare suitable for a solitary person? Ask me this or if you do not wish to ask, then listen to me without asking.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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