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mahabharat 12.9.28: मैं सब प्रकार की आसक्तियों से मुक्त होकर, समस्त ममता के बंधनों से परे हो जाऊँगा। किसी पर आश्रित न होकर, वायु के समान सर्वत्र विचरण करूँगा।॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.9.28 
विमुक्त: सर्वसंगेभ्यो व्यतीत: सर्ववागुरा:।
न वशे कस्यचित्तिष्ठन् सधर्मा मातरिश्वन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मैं सब प्रकार की आसक्तियों से मुक्त होकर, समस्त ममता के बंधनों से परे हो जाऊँगा। किसी पर आश्रित न होकर, वायु के समान सर्वत्र विचरण करूँगा।॥28॥
 
Being free from all kinds of attachments, I shall transcend all bonds of affection. Being not dependent on anyone, I shall roam everywhere like the wind.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)