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mahabharat 12.9.25-26h: मैं न तो जीवन की प्रशंसा करूँगा, न मृत्यु से घृणा करूँगा। यदि कोई व्यक्ति मेरी एक भुजा कुल्हाड़ी से काट दे और दूसरा व्यक्ति दूसरी भुजा पर चंदन मिश्रित जल छिड़क दे, तो मैं न तो पहले के बारे में बुरा सोचूँगा, न ही दूसरे के लिए शुभ कामना करूँगा। मैं दोनों के प्रति समान भावना रखूँगा।   |   mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  12.9.25-26h 
जीवितं मरणं चैव नाभिनन्दन्न च द्विषन्।
वास्यैकं तक्षतो बाहुं चन्दनेनैकमुक्षत:॥ २५॥
नाकल्याणं न कल्याणं चिन्तयन्नुभयोस्तयो:।
 
 
अनुवाद
मैं न तो जीवन की प्रशंसा करूँगा, न मृत्यु से घृणा करूँगा। यदि कोई व्यक्ति मेरी एक भुजा कुल्हाड़ी से काट दे और दूसरा व्यक्ति दूसरी भुजा पर चंदन मिश्रित जल छिड़क दे, तो मैं न तो पहले के बारे में बुरा सोचूँगा, न ही दूसरे के लिए शुभ कामना करूँगा। मैं दोनों के प्रति समान भावना रखूँगा।
 
I will neither praise life nor hate death. If one person cuts off one of my arms with an axe and another sprinkles water mixed with sandalwood on the other, I will neither think ill of the first nor wish well for the other. I will have equal feelings for both of them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)