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mahabharat 12.9.24: चाहे मुझे कुछ मिले या न मिले, दोनों ही स्थितियों में मेरा दृष्टिकोण एक ही रहेगा। मैं महान तप नहीं करूँगा और न ही ऐसा कोई कार्य करूँगा जो जीने या मरने की इच्छा रखने वाले लोग करते हैं।॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.9.24 
अलाभे सति वा लाभे समदर्शी महातपा:।
न जिजीविषुवत् किंचिन्न मुमूर्षुवदाचरन्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
चाहे मुझे कुछ मिले या न मिले, दोनों ही स्थितियों में मेरा दृष्टिकोण एक ही रहेगा। मैं महान तप नहीं करूँगा और न ही ऐसा कोई कार्य करूँगा जो जीने या मरने की इच्छा रखने वाले लोग करते हैं।॥24॥
 
Whether I get something or not, my view will be the same in both situations. I will not indulge in great penance and do any such act which is done by people who wish to live or die.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)