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mahabharat 12.9.22-23: जब घरों से धुआँ निकलना बन्द हो जाएगा, मूसल नीचे रख दिए जाएँगे, चूल्हे की अग्नि बुझ जाएगी, घर में सब लोग खा-पी चुके होंगे, परोसे हुए थालों को इधर-उधर ले जाने का काम समाप्त हो चुका होगा और भिखारी भिक्षा लेकर लौट आएँगे, ऐसे समय मैं एक साथ दो, तीन या पाँच घरों में भिक्षा माँगने जाऊँगा। सब ओर से ममता के बन्धन तोड़कर मैं इस पृथ्वी पर विचरण करता रहूँगा॥ 22-23॥   |   mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  12.9.22-23 
विधूमे न्यस्तमुसले व्यङ्गारे भुक्तवज्जने।
अतीतपात्रसंचारे काले विगतभिक्षुके॥ २२॥
एककालं चरन् भैक्ष्यं त्रीनथ द्वे च पञ्च वा।
स्नेहपाशं विमुच्याहं चरिष्यामि महीमिमाम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब घरों से धुआँ निकलना बन्द हो जाएगा, मूसल नीचे रख दिए जाएँगे, चूल्हे की अग्नि बुझ जाएगी, घर में सब लोग खा-पी चुके होंगे, परोसे हुए थालों को इधर-उधर ले जाने का काम समाप्त हो चुका होगा और भिखारी भिक्षा लेकर लौट आएँगे, ऐसे समय मैं एक साथ दो, तीन या पाँच घरों में भिक्षा माँगने जाऊँगा। सब ओर से ममता के बन्धन तोड़कर मैं इस पृथ्वी पर विचरण करता रहूँगा॥ 22-23॥
 
When the smoke has stopped coming out of the houses, the pestle has been put down, the fire in the hearth has been extinguished, everyone in the house has eaten and drunk, the work of carrying the served plates here and there has been finished and the beggars have returned with alms, at such a time I will go to two, three or five houses at a time for alms. Breaking all bonds of affection from all sides I will keep roaming on this earth.॥ 22-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)