Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.9.21: मैं बिना इस बात की चिंता किए कि वह कम है या बेस्वाद, भिक्षा लूँगा। अगर मुझे एक घर से भिक्षा नहीं मिली, तो मैं दूसरे घरों में भी जाऊँगा। अगर मुझे भिक्षा मिल गई, तो कोई बात नहीं। अगर मुझे भिक्षा नहीं मिली, तो मैं लगातार सात घरों में जाऊँगा, आठवें घर में नहीं जाऊँगा। | mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं बिना इस बात की चिंता किए कि वह कम है या बेस्वाद, भिक्षा लूँगा। अगर मुझे एक घर से भिक्षा नहीं मिली, तो मैं दूसरे घरों में भी जाऊँगा। अगर मुझे भिक्षा मिल गई, तो कोई बात नहीं। अगर मुझे भिक्षा नहीं मिली, तो मैं लगातार सात घरों में जाऊँगा, आठवें घर में नहीं जाऊँगा।
I will get alms without worrying whether they are less or tasteless. If I do not get alms from one house, I will go to other houses as well. If I get alms, it is fine. If I do not get alms, I will go to seven houses in a row and will not go to the eighth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥