Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.9.20: प्रकृति आगे बढ़ती है, भोजन भी अपने आप प्रकट होता है, सर्दी और गर्मी आदि जो परस्पर विरोधी हैं, वे सब आते-जाते रहते हैं, इसलिए मैं इन सबकी चिंता करना छोड़ दूँगा ॥20॥ | mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वभावस्तु प्रयात्यग्रे प्रभवन्त्यशनान्यपि।
द्वन्द्वानि च विरुद्धानि तानि सर्वाण्यचिन्तयन्॥ २०॥
अनुवाद
प्रकृति आगे बढ़ती है, भोजन भी अपने आप प्रकट होता है, सर्दी और गर्मी आदि जो परस्पर विरोधी हैं, वे सब आते-जाते रहते हैं, इसलिए मैं इन सबकी चिंता करना छोड़ दूँगा ॥20॥
Nature moves ahead, food also appears on its own, cold and heat etc. which are opposite opposites, they all come and go, so I will stop worrying about all these. ॥20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥