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mahabharat 12.9.19: मेरा कहीं जाने का कोई विशेष प्रयोजन नहीं होगा। न मैं आगे बढ़ने के लिए उत्सुक होऊँगा, न पीछे मुड़कर देखूँगा। मैं सरल मन से रहूँगा। मेरी दृष्टि अंतर्मुखी होगी। मैं स्थावर और चराचर प्राणियों को बचाते हुए आगे बढ़ता रहूँगा।॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.9.19 
गमने निरपेक्षश्च पश्चादनवलोकयन्।
ऋजु: प्रणिहितो गच्छंस्त्रसं स्थावरवर्जक:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
मेरा कहीं जाने का कोई विशेष प्रयोजन नहीं होगा। न मैं आगे बढ़ने के लिए उत्सुक होऊँगा, न पीछे मुड़कर देखूँगा। मैं सरल मन से रहूँगा। मेरी दृष्टि अंतर्मुखी होगी। मैं स्थावर और चराचर प्राणियों को बचाते हुए आगे बढ़ता रहूँगा।॥19॥
 
There will be no special purpose of my going anywhere. Neither will I be eager to go ahead, nor will I look back. I will live with a simple mind. My vision will be introverted. I will keep moving forward saving the stationary and mobile creatures.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)