श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.9.16 
जङ्गमाजङ्गमान् सर्वानविहिंसंश्चतुर्विधान्।
प्रजा: सर्वा: स्वधर्मस्था: सम: प्राणभृत: प्रति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मैं चारों प्रकार के जीव-जन्तुओं में से किसी को भी कष्ट नहीं दूँगा। मैं अपने-अपने धर्म में स्थित सभी लोगों और सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखूँगा।॥16॥
 
I will not harm any of the four kinds of living and non-living creatures. I will have equal respect for all the people and all living beings who are established in their respective religions.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)