Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.9.14: मैं न किसी के लिए शोक करूँगा, न किसी के लिए हर्षित होऊँगा। मैं निन्दा और प्रशंसा को समान समझूँगा। आशा और ममता का त्याग करके मैं द्वन्द्वरहित हो जाऊँगा और कभी किसी वस्तु का संचय नहीं करूँगा। 14॥ | mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न शोचन्न प्रहृष्यंश्च तुल्यनिन्दात्मसंस्तुति:।
निराशीर्निर्ममो भूत्वा निर्द्वन्द्वो निष्परिग्रह:॥ १४॥
अनुवाद
मैं न किसी के लिए शोक करूँगा, न किसी के लिए हर्षित होऊँगा। मैं निन्दा और प्रशंसा को समान समझूँगा। आशा और ममता का त्याग करके मैं द्वन्द्वरहित हो जाऊँगा और कभी किसी वस्तु का संचय नहीं करूँगा। 14॥
I will neither mourn nor rejoice for anyone. I will consider criticism and praise equally. Having given up hope and affection, I will become conflict-free and will never hoard anything. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥