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mahabharat 12.9.13: मेरा शरीर धूल से ढँक जाएगा और मैं खाली घरों में निवास करूँगा या किसी वृक्ष की जड़ के नीचे लेट जाऊँगा। मैं रुचि-अरुचि का विचार त्याग दूँगा।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.9.13 
पांसुभि: समभिच्छन्न: शून्यागारप्रतिश्रय:।
वृक्षमूलनिकेतो वा त्यक्तसर्वप्रियाप्रिय:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मेरा शरीर धूल से ढँक जाएगा और मैं खाली घरों में निवास करूँगा या किसी वृक्ष की जड़ के नीचे लेट जाऊँगा। मैं रुचि-अरुचि का विचार त्याग दूँगा।॥13॥
 
My body will be covered with dust and I will reside in empty houses or I will lie under a tree at its root. I will give up all thoughts of likes and dislikes.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)