श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 9: युधिष्ठिरका वानप्रस्थ एवं संन्यासीके अनुसार जीवन व्यतीत करनेका निश्चय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.9.1 
युधिष्ठिर उवाच
मुहूर्तं तावदेकाग्रो मन:श्रोत्रेऽन्तरात्मनि।
धारयन्नपि तच्छ्रुत्वा रोचेत वचनं मम॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "अर्जुन! अपने मन और कानों को अपने अन्तःकरण में केन्द्रित करो और दो क्षण तक ध्यान करो, तब तुम्हें मेरी बात अच्छी लगेगी।"
 
Yudhishthira said, "Arjuna! Focus your mind and ears in your inner heart and concentrate for two moments, then you will like what I say."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)