श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 89: राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.89.8 
तस्यां प्रवर्तमानायां ये स्युस्तत्परिपन्थिन:।
दस्यवस्तद्वधायेह ब्रह्मा क्षत्रमथासृजत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जो लोग वेदों के अध्ययन-अध्यापन में अथवा वेदविहित यज्ञों और यज्ञानुष्ठानों में विघ्न डालते हैं, वे डाकू हैं। उन डाकुओं का नाश करने के लिए ही ब्रह्माजी ने क्षत्रिय वर्ण की रचना की है। 8॥
 
Those who create obstacles in the study and teaching of the Vedas or in the yagyas and yagya rituals recommended by the Vedas are dacoits. Lord Brahma has created the Kshatriya caste only to kill those bandits. 8॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd