श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 89: राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.89.7 
कृषिगोरक्ष्यवाणिज्यं लोकानामिह जीवनम्।
ऊर्ध्वं चैव त्रयी विद्या सा भूतान् भावयत्युत॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इस लोक में कृषि, पशुपालन और वाणिज्य ही लोगों की जीविका के साधन हैं; किन्तु ये तीनों वेद उच्च लोकों की भी रक्षा करते हैं। ये ही यज्ञों द्वारा समस्त प्राणियों की उत्पत्ति और वृद्धि के कारण हैं। ॥7॥
 
Agriculture, animal husbandry and commerce are the means of livelihood for people in this world; but the three Vedas protect even the higher worlds. They are the cause of the birth and growth of all creatures through sacrifices. ॥ 7॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd