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mahabharat 12.89.5: यह सुनकर वह अवश्य लौट आएगा। यदि इसके बाद भी वह कुछ न कहे, तो राजा को यह कहना चाहिए - 'प्रभो! हे कुन्तीपुत्र! मैंने पूर्वकाल में जो पाप किए हैं, उन्हें भूल जाइए! इस प्रकार नम्रतापूर्वक ब्राह्मण को प्रसन्न करना राजा का सनातन कर्तव्य है।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.89: राजाके कर्तव्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 89: राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.89.5 
असंशयं निवर्तेत न चेद् वक्ष्यत्यत: परम्।
पूर्वं परोक्षं कर्तव्यमेतत् कौन्तेय शाश्वतम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर वह अवश्य लौट आएगा। यदि इसके बाद भी वह कुछ न कहे, तो राजा को यह कहना चाहिए - 'प्रभो! हे कुन्तीपुत्र! मैंने पूर्वकाल में जो पाप किए हैं, उन्हें भूल जाइए! इस प्रकार नम्रतापूर्वक ब्राह्मण को प्रसन्न करना राजा का सनातन कर्तव्य है।॥5॥
 
On hearing this he will surely return. If even after this he does not say anything then the king should say this - 'Lord! Forget the sins I have committed in the past, O son of Kunti! It is the eternal duty of the king to please the Brahmin in this manner with humility. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)