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mahabharat 12.89.4: इसके बाद भी यदि वह ब्राह्मण वापस न लौटे, तो राजा को ब्राह्मणों के समाज में जाकर उससे कहना चाहिए - 'ब्राह्मण! यदि तुम यहाँ से चले जाओगे, तो ये लोग किसके आश्रय में रहकर धर्म के नियमों का पालन करेंगे?'॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.89: राजाके कर्तव्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 89: राजाके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.89.4 
स चेन्नोपनिवर्तेत वाच्यो ब्राह्मणसंसदि।
कस्मिन्निदानीं मर्यादामयं लोक: करिष्यति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद भी यदि वह ब्राह्मण वापस न लौटे, तो राजा को ब्राह्मणों के समाज में जाकर उससे कहना चाहिए - 'ब्राह्मण! यदि तुम यहाँ से चले जाओगे, तो ये लोग किसके आश्रय में रहकर धर्म के नियमों का पालन करेंगे?'॥4॥
 
Even after this, if that Brahmin does not return, then the king should go to the society of Brahmins and say to him - 'Brahmin! If you go away from here, under whose shelter will these people live and follow the rules of religion?' 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)